प्रीपेमेंट से ब्याज कैसे बचाएं
प्रीपेमेंट यानी अपनी सामान्य EMI के अलावा मूलधन में अतिरिक्त राशि चुकाना। यह होम लोन का ब्याज घटाने का सबसे ताक़तवर तरीका है — और RBI नियमों के तहत फ्लोटिंग लोन पर इस पर कोई पेनल्टी नहीं लगती।
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प्रीपेमेंट सिम्युलेटर खोलें →क्यों ज़रूरी है प्रीपेमेंट?
₹50 लाख के लोन पर 8.5% दर और 20 साल की अवधि में आप लगभग ₹54.14 L सिर्फ़ ब्याज में चुकाते हैं। हर महीने सिर्फ़ ₹10,000 अतिरिक्त मूलधन में डालने से आप लोन 6–8 साल पहले खत्म कर सकते हैं और ₹15–25 लाख तक ब्याज बचा सकते हैं।
प्रीपेमेंट की रणनीति
- शुरुआती सालों में प्रीपेमेंट करें — तब असर सबसे ज़्यादा होता है।
- बोनस या सालाना इन्क्रीमेंट का कुछ हिस्सा प्रीपेमेंट में लगाएं।
- अवधि घटाएं, EMI नहीं — इससे ब्याज की बचत अधिकतम होती है।
- आपातकालीन फ़ंड बनाए रखें; पूरा पैसा प्रीपेमेंट में न लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या फ्लोटिंग रेट होम लोन पर प्रीपेमेंट पेनल्टी लगती है?
नहीं। RBI के नियमों के अनुसार बैंक फ्लोटिंग-रेट होम लोन पर कोई प्रीपेमेंट या फोरक्लोज़र पेनल्टी नहीं लगा सकते। आप जब चाहें आंशिक या पूरा प्रीपेमेंट कर सकते हैं।
प्रीपेमेंट से अवधि कम करें या EMI?
अवधि कम करना (tenure reduction) ज़्यादा फ़ायदेमंद होता है — इससे आप सबसे ज़्यादा ब्याज बचाते हैं। EMI कम करने से मासिक राहत मिलती है पर कुल बचत कम होती है। ज़्यादातर मामलों में अवधि घटाना बेहतर है।
प्रीपेमेंट कब करना सबसे फ़ायदेमंद है?
लोन के शुरुआती सालों में, क्योंकि तब EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है। जितनी जल्दी आप मूलधन घटाएंगे, उतना ही कम ब्याज पूरे लोन पर लगेगा।